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शुक्रवार, 16 जनवरी 2009


afgaanistaan में एक सड़क ऐसी है जिस पर महिलाएं नहीं जा सकती.वहाँ के एक पुराने आर्मी अधिकारी का ये कहना है की इस सड़क पर महिलाओं का चलना इस्लाम के ख़िलाफ़ है."नई दुनिया "अखबार में छपी इस ख़बर में ये बताया गया है कि वो सड़क हॉस्पिटल , मस्जिद तक जाने का रास्ता है। सोचने कि बात ये है कि उन महिलाओं को कितनी मुश्किल होती होगी जो उस मुल्लाह बने अफसर कि बात मानने को मजबूर हो जाती हैं.ख़बर में आगे बताया गया है कि वो अफसर लाठी लेकर सड़क पर घूमता है। आख़िर ऐसा क्यों है कि आदमी का वहाँ जाने कुछ ग़लत नहीं है लेकिन औरत का वहाँ जाना ठीक नहीं माना जाता?क्या किसी धर्म में ऐसा भी हो सकता है? इन मुल्लाओं द्बारा बिना तर्क और बिना किसी कारण के रोक लगाने का ये कोई पहला किस्सा सामने नहीं आया है.आख़िर कब तक पुराने ज़माने से चली आ रही इन बेबुनियाद बातों को माना जाता रहेगा? किसी समाज में इस तरह की चीज़ें जहाँ एक और उस समाज में रूढ़िवाद को बढ़ावा देती हैं वहीं उस समाज को सौ साल पीछे ले जाती हैं.आख़िर इन मुल्लाओं को किसने ये फ़ैसला करने का अधिकार दिया है कि किसी सड़क पर कौन जाएगा और कौन नहीं?सदियों से इस समाज में महिलाओं के साथ अत्याचार होते आ रहे हैं। कभी एक बच्ची कि शादी बुद्धे से कर दी जातियो है तो कभी इन्हें बेकार कि रूढियों में बाँध दिया जाता है.अपनी कट्टर विचारधारा पर चलने वाले ये मुल्ला आख़िर कब तक इसी तरहां औरतों और लड़कियों को बांधते रहेंगे?आख़िर क्यों उस समाज में एक महिला भी उसी तरह खुलकर नहीं जी सकती जैसे ये पुरूष जीते हैं?क्या कोई धर्म ये कह सकता है कि सारे नियम चलाने का हक केवल पुरुषों को है और साड़ी यातनाएं सहने के हिस्से में ?

आप सभी के इस विषय पर विचार आमंतरित हैं............

2 टिप्‍पणियां:

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सही मुददे को उठाया है आपने।

P.N. Subramanian ने कहा…

आश्चर्य की यह सब इस्लाम के नाम पर होता है.
http://mallar.wordpress.com